Serving Humanity With Care, Dignity & Compassion
Mahatma Buddh Sansthan, Kotputli is a social welfare organization dedicated to the welfare and upliftment of senior citizens, women, persons with disabilities and other vulnerable sections of society. Established in 2018, the Sansthan works towards creating a more caring, inclusive and supportive society.
Through Swayamsiddha Ashram, we strive to provide a safe and respectful environment where those in need can receive care, support and essential facilities. Our services include nutritious food, clean drinking water, clothing, medical care, yoga and wellness support, emergency assistance and other daily essentials.
Along with care and support at the Ashram, Mahatma Buddh Sansthan also works in areas such as senior citizen welfare, women welfare, disability support and rehabilitation, environmental protection, rural development, blood donation awareness and community awareness programs.
Our mission is to serve humanity with compassion and dignity while working towards a society where every individual is treated with respect, care and equal opportunity.
Our Vision & Mission
Working together to create a caring, inclusive and dignified society for everyone.
Our Vision
To build a compassionate and inclusive society where senior citizens, persons with disabilities, women and other vulnerable sections of society can live with dignity, security and respect.
Our Mission
To provide care, support and essential facilities to people in need through Swayamsiddha Ashram, while promoting education, rehabilitation, social welfare, awareness and community development.
Our Values
We believe in compassion, dignity, equality, service and respect for every individual. Our work is guided by the commitment to serve humanity with care and responsibility.
महात्मा बुद्ध संस्थान, कोटपूतली
संस्था परिचय एक नजर में
महात्मा बुद्ध संस्थान, डाबला रोड, कोटपूतली एक सामाजिक व कल्याणकारी संस्था है, जिसका गठन राजस्थान संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1958 के तहत राजस्थान सरकार द्वारा दिनांक 14 दिसंबर, 2018 को किया गया और जिसका रजिस्ट्रार संस्थाएँ, राजस्थान सरकार कार्यालय में क्रमांक Coop@2018@Jaipur@103202 पर इंद्राज किया गया।
इस संस्था की स्थापना समाज में व्याप्त आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक असमानता को दूर करना तथा समाजोत्थान व राष्ट्रोत्थान के लिए कार्य करने हेतु की गई है।
संस्था द्वारा लगातार वृद्धजनों, बेघर, संतानहीन, निर्धन, असहाय, बेसहारा, विधवा, तलाकशुदा महिलाओं व विशेष योग्यजनों यथा मानसिक मंदता, मूक-बधिर, बहु निःशक्तता, मानसिक रोगी, श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, अल्प दृष्टि इत्यादि बालकों व वयस्कों के शिक्षार्थ तथा पुनर्वास व शिक्षा संबंधी कार्यों को प्राथमिकता से किया जा रहा है।
विशेष योग्यजनों के शिक्षार्थ व कल्याणार्थ हेतु संस्था का दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 51(2) के अंतर्गत राजस्थान सरकार के निदेशालय विशेष योग्यजन विभाग से 14 फरवरी, 2024 को पंजीयन किया गया है। जिसके तहत दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
उद्देश्य
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्धन्ते, आयुर्विद्या यशो बलम्॥
वृद्धाश्रम का मुख्य उद्देश्य, बेघर, बेसहारा, जरूरतमंद इत्यादि बुजुर्गों को सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा देखभाल, मनोरंजन, योग एवं एक सम्मानजनक जीवन वातावरण उपलब्ध कराना है।
यह संस्था अपनी स्थापना से लेकर आज तक विगत 07 वर्षों में निरंतर शिक्षा का प्रसार, वृद्धजनों व महिलाओं असहायजनों का संरक्षण, समाज में असमानता को दूर करना, विशेष योग्यजनों को आत्मनिर्भर बनाना, पर्यावरण का संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने, रक्तदान के प्रति युवाओं में चेतना उत्पन्न करना, एड्स जैसी घातक बीमारियों से बचाना तथा भाईचारे की भावना का विकास करना जैसे उद्देश्यों को लेकर कार्य कर रही है।
इसके साथ ही खेल-कूद की भावना, प्रदूषण, वायु प्रदूषण को रोकने, कमजोर व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों का विकास तथा ग्रामीण विकास हेतु चेतना शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ संपादित कर रही है।
वृद्धों की चिकित्सा जांच देखभाल, अकेलेपन से मुक्ति, संयुक्त परिवारों का टूटना और समय की कमी जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन डॉक्टर, नर्स द्वारा स्वास्थ्य जांच, आपातकालीन सेवाएं, नियमित योग इत्यादि सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाती हैं।
इसके अतिरिक्त वृद्धजनों को घरेलू हिंसा से बचाना, संपत्ति की सुरक्षा करना, शोषण से बचाना, हिंसा करने वालों से बचाना और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने के लिए स्वयं सिद्धा आश्रम की आवश्यकता है।
आश्रम में प्रवेश हेतु पात्रता
1. वृद्धजन या वरिष्ठ नागरिक पुरुष 58 वर्ष या इससे अधिक आयु का एवं महिला 55 वर्ष या इससे अधिक आयु की हो और किसी भी राज्य के निवासी हों।
2. ऐसे निराश्रित एवं असहाय पुरुष-महिला जो किसी प्रकार के आश्रम सहारा या सहायता से वंचित हों, संतानहीन हों, स्वयं के परिवार से पीड़ित हों, जो अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ हों, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं हो, ऐसे महिला-पुरुष के लिए प्रवेश हेतु कोई आयु सीमा नहीं है।
3. वृद्ध बीमार, परित्यक्ता महिलाएं, हिंसा से पीड़ित महिलाओं, विधवा, तलाकशुदा कामकाजी महिलाओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाती है।
4. मानसिक विमंदित बालक-बालिकाओं व वृद्धजनों को भी प्रवेश में प्राथमिकता दी जाती है।
स्वयं सिद्धा आश्रम कोटपूतली का कर्तव्य
वृद्धानां वचनेनैव कार्यसिद्धिर्भवति हि।
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
संस्था द्वारा वृद्धजन, बेघर, असहाय, दिव्यांगजन, बीमार, परित्यक्ता, विधवा, तलाकशुदा, कामकाजी महिलाओं, बी.पी.एल. सूची में दर्ज निर्धनों, संतानहीन, निराश्रित, मानसिक एवं बौद्धिक रोग से ग्रसित, नशामुक्ति में लिप्त लोगों इत्यादि सामाजिक कार्य करने पर राजस्थान सरकार ने 30 मई, 2025 को संस्था को कोटपूतली-बहरोड़ जिला मुख्यालय पर "स्वयं सिद्धा आश्रम" की मान्यता जारी की है।
यह मान्यता माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट घोषणा बिंदु संख्या 67 के तहत जारी की गई है। आज संस्था के अंतर्गत स्वयं सिद्धा आश्रम में 50 आवासी अपनी सभी सुविधाओं के साथ जीवनयापन कर रहे हैं।
स्वयं सिद्धा आश्रम-महात्मा बुद्ध संस्थान आज निम्न भावार्थ को चरितार्थ करते हुए कार्य कर रहा है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
संस्था में आवासियों के लिए पौष्टिक एवं शुद्ध आहार, स्वच्छ पेयजल, वस्त्र, चिकित्सा सुविधाएं एवं दैनिक उपयोग की समुचित व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध है।
इसके साथ ही उनकी पेंशन, किराया पास, कानूनी अधिकारों की जानकारी, पौधारोपण इत्यादि अनेक जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु अधिकारियों, समाजसेवियों व जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है।
आश्रम में कार्मिकों द्वारा वरिष्ठजनों की सेवा व उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसी कारण हमारा स्वयं सिद्धा आश्रम समुचित व्यवस्थाओं की पूर्णता में राजस्थान के वृद्धाश्रमों में अपना एक महत्व रखता है।
हमारा प्रयास है कि समाज के सभी वर्गों से जुड़कर आश्रम की सुविधाओं को और बेहतर करने का प्रयास करेंगे और "जिनका कोई नहीं उनके हम" वाक्य को चरितार्थ करने में आश्रम की संपूर्ण टीम कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
स्वयं सिद्धा आश्रम राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से अनुदानित व मान्यता प्राप्त है।
मेरा व आश्रम की टीम का प्रयास है कि दानदाताओं का सहयोग लेकर हम आश्रम में आवासियों के लिए और सुविधाओं का विस्तार करेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ सभी आश्रमवासियों व आश्रम से जुड़े हुए सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ।
डॉ. एच.एन. धोलिवाल
सचिव, महात्मा बुद्ध संस्थान
(स्वयं सिद्धा आश्रम), कोटपूतली
जिला-कोटपूतली-बहरोड़, राजस्थान
पिन कोड: 303108
मोबाइल: 9828012017
ईमेल: kathikdholiwal17@gmail.com